Chaiti Chhath Puja 2025: चैती छठ पूजा के पीछे ये है असली कहानी ? कैसे कार्तिकी छठ से है अलग ?

Chaiti Chhath Puja 2025: चैती छठ हिंदू परिवार द्वारा मनाए जाने वाला प्रख्यात महापर्व है। यह पर्व भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैती छठ चैत महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से आरंभ होता है और सप्तमी तिथि को सूर्य अर्घ के साथ समाप्त होता है। इस पर्व को महिलाएं अपने संतान की दीर्घ आयु और परिवार की सुख शांति के लिए करती है।

चैती छठ और कार्तिकी छठ में क्या विभिन्नताएं है ?

हिन्दू पंचांग के अनुसार छठ महापर्व दो विभिन्न महीनों में मनाया जाता है। चैत ( अप्रैल) महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चैती छठ मनाया जाता है और कार्तिक (नवंबर) महीने की षष्ठी तिथि को कार्तिकी छठ मनाया जाता है। चैती छठ में मौसम का रुख सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ता है तो वहीं कार्तिकी छठ में मौसम गर्मी से सर्दी की ओर करवट बदलता है।

चैती छठ से जुड़ी दंतकथा !

पौराणिक काल में प्रियवद नाम के प्रतापी राजा थे। उन्हें ईश्वर द्वारा संपूर्ण यश और वैभव प्राप्त था केवल संतान का सुख नहीं था। तब महर्षि कश्यप ने राजा प्रियवद से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया और यज्ञाहुति के लिए बनाई गई खीर को राजा की पत्नी मालिनी को खिला दिया। परिणाम स्वरूप राजा प्रियवद के यहां पुत्र ने जन्म लिया लेकिन वह मृत पाया गया। अपने मृत पुत्र को लेकर राजा शमशान चले गए और वहां अपने प्राण त्यागने का निश्चय किया। उनके इस पीड़ा को देख कर भगवान की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुईं जो देवी षष्ठी थीं। देवी ने राजा से उनकी उपासना और षष्ठी व्रत को आम जनों तक पहुंचाने के लिए कहा। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें फिर से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तब से ऐसा प्रचलन है की जो भी देवी षष्ठी का व्रत पूरे श्रद्धा भाव से करता है उनकी संतान दीर्घायु होती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

(बसुन्धरा की रिपोर्ट)

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