एक मुसाफिर के दिल की आवाज़, पहला इश्क था छपरा और तूने ए ज़िंदगी

rachnakosh.in · 13 February 2025 · 1 मिनट

एक मुसाफिर के दिल की आवाज़, पहला इश्क था छपरा और तूने ए ज़िंदगी

जब बुजुर्गों की नसीहतों में अपनी बर्बादी की मिसाल दी जाने लगे, तो समझ लेना कि इश्क और जिंदगी ने बहुत कुछ सिखा दिया है। पुरानी यादों और छपरा के उस पहले इश्क के नाम, युवा कलमकार अनीश कुमार 'देव' की एक खास पेशकश। पढ़िए यह मर्मस्पर्शी रचना जो मासूम दिलों के बँटवारे और अधूरे इंतज़ार की बात करती है।


कदमों को रोक उसने इक सवाल किया

एक उड़ते परिंदे को पिंजरे में डाल दिया


कुछ तो काम आई इश्क-ए-बर्बाद ज़िंदगी

बुजुर्गों ने नसीहत में मेरी मिसाल दिया


वो नहीं आने वाला लौट कर ये जानते हुए

इंतज़ार में उनके गुज़ार हमने कई साल दिया


बचपन वाली खुशियों का अब वो आँगन कहाँ

बँटवारों ने मासूम दिलों पे खींच दीवार दिया


पहला इश्क था छपरा और तूने ए ज़िंदगी

एक रोज़ वहां से भी निकाल दिया


रचनाकार - अनीश कुमार 'देव'