बड़े मकान का आँगन और पुराने कपड़ों में कोमल दिल, 'क्योंकि मुझे प्रेम है तुमसे...'

ऊंचे मकान की दहलीज और एक तरफा मोहब्बत: एक गरीब दिल की अधूरी दास्तान। कहते हैं इश्क अमीरी-गरीबी की दीवारें नहीं देखता, लेकिन समाज की ये दीवारें अक्सर मोहब्बत के बीच आ खड़ी होती हैं।अनीश कुमार 'देव' की लिखी यह कविता एक ऐसे ही प्रेमी की कहानी है जो बड़े मकान के झरोखे से अपनी 'पंखुड़ी' को निहारता है, पर अपनी फटी एड़ियों और पुराने कपड़ों की वजह से उसे पाने का ख्वाब देखने से डरता है।
तुम फूल हो...
उस बड़े से मकान के आँगन की
जिसे मुझ जैसे को देखने तक की मनाही है
हाँ तुमसे इश्क़ है, लगाव है,
चाहत है, मोहब्बत है, प्यार है
या कुछ और है, जो तुम समझो
मैं तुम्हें देखने की चाहत में
इस गली में आया करता हूँ,
उस बड़े से मकान की चार-दीवारी में
लगे उस बड़े से किवाड़ के झरोखे से,
देख कर खिल उठता है दिल मेरा...
हाँ डर लगता है उस कुत्ते से
जो लगा है तुम्हारी पहरेदारी में...
जाने क्या बैर है उसको मुझसे
देखते ही भौंकने लगता है... भाऊ-भाऊ!
जैसे उसके मालिक के आँगन की
खुशबू को चुरा लूंगा 'मैं'.....!!!
एक दिन था खोए हुए तट पर
कुछ मिले-जुले सवाल मेरे मन में,
गुजरते हुए तुम्हारी गली से यही
सोच रहा था...
मिलोगी जब तुम, जिस दिन मुझसे
क्या होगी ? कैसे होगी ?
बातों की शुरुआत हमारी?
कहीं तुम भी फेर तो न लोगी मुँह अपना,
मेरा पहनावा, फटी हुई एड़ियों को देख...
पुराने कपड़ों में कोमल दिल है मेरा
बिल्कुल तुम्हारी कोमल पंखुड़ियों के जैसे....!!
हाँ-हाँ याद आया, मिलोगी जब
तो कहूंगा मुझे प्रेम है तुमसे...
और तुम्हें भी मुझसे...
हाँ शायद तुम मुकर जाओगी
लेकिन दिखता है तुम्हारे चेहरे पर,
तुम मानो या न मानो, तुम्हें प्रेम है मुझसे
तभी तो मैं खींचा हुआ चला आता हूँ...
इस बड़े से मोहल्ले के बड़े-बड़े मकानों से
घिरी हुई इस गली में... उस बड़े से
मकान के एक कोने से झांकती हुई
मेरे इंतज़ार में, तुम्हारी आँखों को देखने....!!
अच्छा छोड़ो!, फिर ये बताओ
चलोगी तुम मेरे उस छोटे से आँगन में?
तब तो मेरे आँगन का दृश्य ही बदल जाएगा,
चांद-तारे झांकेंगे बादल से, चुपके-चुपके....!
हाँ, ये मनोहर ख्वाब है बस,
जो कभी पूरा होने से रहा...!!
हाँ, लेकिन तुम ऐसे ही चहकते रहना
मैं रोज़ आया करूँगा तुम्हें देखने
क्योंकि मुझे प्रेम है तुमसे, मुझे लगाव
है तुमसे, मुझे प्यार है तुमसे, मुझे इश्क़ है तुमसे....!
~ अनीश कुमार 'देव'