राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित छपरा की अनिशा बन रही हैं समाज की प्रेरणा

समाज में कुछ लोग अपनी सफलता की इबारत खुद लिखते हैं, तो कुछ लोग अपनी सफलता के साथ-साथ दूसरों की जिंदगी को भी रोशन करने का बीड़ा उठाते हैं। बिहार के सारण जिले (छपरा) की रहने वाली अनिशा इसी श्रेणी की शख्सियत हैं। अपनी कड़ी मेहनत, अटूट सेवा-भाव और असाधारण सामाजिक योगदान के बल पर देश के सर्वोच्च सम्मान 'राष्ट्रपति पुरस्कार' से सम्मानित हो चुकीं अनिशा आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं।
लेकिन उनके इस मुकाम से भी ज्यादा खूबसूरत उनका वह सफर है, जो उन्होंने छपरा की तंग गलियों से लेकर देश के मंच तक तय किया है और उससे भी बढ़कर, वे आज समाज के वंचित बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं।
अभावों से लड़कर गढ़ी सफलता की इबारत
छपरा के प्रतिष्ठित जगदम कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी करने वाली अनिशा ने जीवन की शुरुआती कठिनाइयों के आगे कभी घुटने नहीं टेके। छात्र जीवन से ही उनमें समाज के प्रति कुछ खास करने की ललक थी। नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली अनिशा ने कम उम्र में ही यह समझ लिया था कि देश का असली विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक समाज के आखिरी पायदान पर खड़े बच्चे को शिक्षा का अधिकार न मिले।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मान: पसीने और निष्ठा की जीत
अनिशा के सेवा-कार्यों का दायरा और उनकी निष्ठा इतनी प्रगाढ़ रही कि उनकी उपलब्धियों ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। उन्हें सामाजिक और स्वयंसेवी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान न सिर्फ अनिशा के लिए, बल्कि पूरे बिहार और विशेषकर सारण की युवा पीढ़ी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।

झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब बच्चों के लिए 'उम्मीद' की किरण
प्रशस्ति पत्र और सम्मान मिलने के बाद भी अनिशा का वास्तविक ध्येय बदला नहीं है। वे आज भी जमीन से जुड़ी हुई हैं। छपरा क्षेत्र में वे गरीब, बेससहारा और मजदूर वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा अभियान चला रही हैं।
जो बच्चे आर्थिक तंगी के कारण स्कूल का मुंह तक नहीं देख पाते थे, अनिशा उन्हें न केवल पढ़ाने का काम कर रही हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास जगा रही हैं। उनके इस निशुल्क कोचिंग सेंटर या अनौपचारिक कक्षाओं में बच्चे न सिर्फ अक्षर ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि अपने सपनों को पंख देने का हौसला भी पा रहे हैं।

युवाओं के लिए मिसाल
आज के दौर में जब युवा अक्सर अपने करियर की दौड़ में व्यस्त रहते हैं, अनिशा ने यह साबित कर दिया है कि समाज के प्रति हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है। उनकी यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने दम पर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता है।
छपरा की यह 'बेटी' आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इरादे बुलंद हों, तो न सिर्फ खुद की तकदीर बदली जा सकती है, बल्कि सैकड़ों बेसहारा बच्चों के अंधेरे जीवन में शिक्षा की दीपशिखा भी जलाई जा सकती है।