Patna University : रिजल्ट में देरी से रुकी स्कॉलरशिप, समर्थ पोर्टल की धांधली के खिलाफ RSSS का मोर्चा

पटना विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रशासनिक व शैक्षणिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति (RSSS) ने 3 सितंबर को विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। समिति का कहना है कि संकायाध्यक्ष और छात्र कल्याण अधिकारी को कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
छात्रों की प्रमुख मांगें :
अंक पत्रों (Marksheets) की मूल प्रति तुरंत मिले: सत्र 2024–2028 के B.Sc, BA, और B.Com के Semester-1, Semester-2 और Semester-3 का परीक्षा परिणाम का मूल अंक पत्र अभी तक संबंधित विभागों में नहीं पहुंचा है। इसके कारण छात्रों में अनिश्चितता का माहौल है और वे छात्रवृत्ति (Scholarship) का फॉर्म भी नहीं भर पा रहे हैं।
परीक्षा शुल्क में वृद्धि पर रोक व लेट फाइन कम हो: सेमेस्टर परीक्षा फॉर्म फीस में लगातार हो रही बढ़ोतरी से गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के छात्रों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ऑनलाइन समर्थ पोर्टल की गड़बड़ियों से जो छात्र समय पर फॉर्म नहीं भर पाते, उनसे ₹3,000 तक का भारी लेट फाइन वसूला जा रहा है। समिति ने लेट फाइन को अधिकतम ₹100 करने तथा ऑनलाइन समर्थ पोर्टल के बजाय ऑफलाइन परीक्षा फॉर्म की व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग की है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है। खासकर छात्राओं के साथ छेड़खानी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ठोस सुरक्षा रणनीति और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

लाइब्रेरी की स्थिति में सुधार: सेंट्रल और कॉलेज लाइब्रेरी की जर्जर स्थिति को दुरुस्त करने, नए सिलेबस के अनुसार किताबें अपडेट करने और लाइब्रेरी को 24×7 खोलने की मांग उठाई गई है।
कैंपस में Wi-Fi सुविधा: विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेज परिसरों में इंटरनेट/Wi-Fi की निर्बाध सुविधा तुरंत बहाल करने का आग्रह किया गया है।
पटना विश्वविद्यालय में उठ रही ये मांगें केवल प्रशासनिक कमियों का ब्योरा नहीं, बल्कि आम और मध्यमवर्गीय छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं। लेट फाइन और समर्थ पोर्टल जैसी डिजिटल अड़चनों से राहत, छात्रवृत्ति के लिए अंक पत्र की समय पर उपलब्धता और परिसरों में छात्राओं की सुरक्षा बेहद बुनियादी जरूरतें हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों के इस आक्रोश को चेतावनी के रूप में देखे और इन 5 सूत्री मांगों पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करे, ताकि कैंपस में पढ़ाई का बेहतर माहौल कायम रह सके।