पइसा, पापी पेट आ पछतावा: सारण के युवा कवि कल्लू सिंह के कलम से एगो सार्थक प्रहार

rachnakosh.in · 11 January 2026 · 1 मिनट

पइसा, पापी पेट आ पछतावा: सारण के युवा कवि कल्लू सिंह के कलम से एगो सार्थक प्रहार

एगो बहुत भावुक आ मर्मस्पर्शी भोजपुरी ग़ज़ल, जवन जिंदगी के कड़वा सच आ मानवीय संवेदना के बखूबी दरसावत बा। ग़ज़ल मनुष्य के जीवन में आवे वाला उतार-चढ़ाव, अचानक मिले वाला धोखा आ वक्त के बेरहमी पर लिखल गइल बा। बिहार के सारण जिला के डुमरी (मांझी) निवासी प्रखर रचनाकार रंजीत कुमार सिंह, उर्फ कल्लू सिंह आपना भोजपुरी रचना के माध्यम से आज के स्वार्थी समाज पर करारा प्रहार कइले बाड़न। आज के स्वार्थी दुनिया में कइसे इंसानियत दम तोड़ रहल बा, युवा कलमकार रंजीत कुमार सिंह के ई रचना 'रोटी के संघर्ष' से लेके 'अपराध के दलदल' तक के सफर के बखूबी बयां करत बा..।


जब अचके में लोगवा भुला जाला हो

दिल के अरमान सगरी लुटा जाला हो


रोज़ जरत रहे जवन सनेहियां के बाती

बिन हवा के ऊ काहे बुता जाला हो


केहू पूछ लेवेला हंस के जे हाल हमर

मन अढ़उल के ज‌ईसन फूला जाला हो


दिन में चयन नइखे मिलत रोटी खातिर

रातियों में काहवा निंदिया हेरा जाला हो


आदमी आदमी के मारता पईसा खातिर

धन ध‌ईले रह जाई देह ओरा जाला हो


सब चिंता फ़िकर वोही दिन खतम होला

ज़हिया सबदीन ला अंखियां मुना जाला हो


रचनाकार - रंजीत कुमार सिंह, उर्फ कल्लू सिंह, डुमरी (मांझी)