Irrfan Khan Birth Anniversary : आँखों से अभिनय करने वाला वो जादूगर, जिसकी कमी हमेशा खलेगी

rachnakosh.in · 7 January 2026 · 3 मिनट

Irrfan Khan Birth Anniversary : आँखों से अभिनय करने वाला वो जादूगर, जिसकी कमी हमेशा खलेगी

बॉलीवुड और हॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले साहबजादे इरफान अली खान का जन्म 7 जनवरी 1967 को राजस्थान में हुआ था। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनके संवाद आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। इरफान खान एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के केवल अपने हुनर और सादगी के दम पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई।



संघर्ष से सफलता तक का सफर


इरफान खान की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। एक समय ऐसा था जब उनके पास फिल्म देखने तक के पैसे नहीं थे, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर वे उसी 'जुरासिक वर्ल्ड' फिल्म का हिस्सा बने। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से शिक्षा लेने के बाद, उन्होंने लंबे समय तक टेलीविजन धारावाहिकों जैसे चाणक्य और चंद्रकांता में काम किया। उन्हें असली पहचान फिल्म 'हासिल' और 'मकबूल' से मिली, जहाँ उन्होंने दिखाया कि एक नायक के अलावा वे जटिल और नकारात्मक भूमिकाएं भी बखूबी निभा सकते हैं।



सिनेमा में अमूल्य योगदान


इरफान को उनकी 'आँखों से बात करने' की शैली के लिए जाना जाता था। उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्में इस प्रकार हैं:


पान सिंह तोमर: इसके लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

द लंचबॉक्स: इस फिल्म ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संवेदनशील अभिनेता के रूप में स्थापित किया।

हिंदी मीडियम: इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹300 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चोट की।

पीकू: अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ उनकी केमिस्ट्री ने सबका दिल जीत लिया।


हॉलीवुड में भारत का चेहरा


इरफान उन चंद भारतीय अभिनेताओं में से एक थे जिन्होंने हॉलीवुड में सिर्फ छोटी भूमिकाएं नहीं कीं, बल्कि लाइफ ऑफ पाई, स्लमडॉग मिलियनेयर, और इन्फर्नो जैसी बड़ी फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। इरफान खान अक्सर कहते थे, "काम को बोलने दो, नाम की क्या जरूरत है।" 29 अप्रैल 2020 को कैंसर की वजह से उनका निधन हो गया, लेकिन उनके जन्मदिन पर हम उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में याद करते हैं जिसने अभिनय की परिभाषा बदल दी। उनकी सादगी और प्रतिभा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।



इरफान खान के यादगार संवाद 


1. फिल्म: हासिल (2003)


"गाली तो हम देते नहीं किसी को, पर कोई दे तो बिना लिए छोड़ते भी नहीं"


2. फिल्म: पान सिंह तोमर (2012)


"बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में"


3. फिल्म: लाइफ ऑफ पाई (2012)


"मुझे लगता है कि अंत में सब कुछ छोड़ देना ही जीवन है, लेकिन सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब आपको अलविदा कहने का मौका नहीं मिलता"


4. फिल्म: द लंचबॉक्स (2013)


"कभी-कभी गलत ट्रेन भी सही जगह पहुँचा देती है"


5. फिल्म: जज्बा (2015)


"शराफत की दुनिया का किस्सा ही खत्म, अब जैसी दुनिया वैसे हम"


6. फिल्म: हिंदी मीडियम (2017)


"एक रामलीला में हमने रावण का रोल किया था... आज भी मोहल्ले वाले हमें रावण के नाम से ही जानते हैं"


7. फिल्म: अंग्रेजी मीडियम (2020), इरफान का आखिरी संदेश


"इनसाइड आई एम वैरी इमोशनल, आउटसाइड आई एम वैरी हैप्पी।" (यह उनके आखिरी वीडियो मैसेज का हिस्सा था जिसने करोड़ों फैन्स को रुला दिया था।)