एहसासों की जुबानी: 'तू कृष्ण है तो मैं तेरी मुरली की तान बनूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ...'

rachnakosh.in · 11 July 2025 · 2 मिनट

एहसासों की जुबानी: 'तू कृष्ण है तो मैं तेरी मुरली की तान बनूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ...'

"एहसासों को लिखूँ या लिख कर एहसास करूँ..."। प्रेम की इसी उलझन और अगाध श्रद्धा को बयां करती रानी साह की लिखी यह कविता पाठक को एक रूहानी सफर पर ले जाती है। इसमें एक प्रेमी अपने साथी के प्रति पूर्ण समर्पण भाव दिखाते हुए कहता है कि यदि तुम सागर हो, तो मैं तुम्हारी लहर बनूँ। प्रकृति और कृष्ण-राधा के प्रतीकों के जरिए बुनी गई यह रचना प्रेम की पराकाष्ठा को खूबसूरती से दर्शाती है।


एहसासों को लिखूँ या लिख कर 

एहसास करूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ


तू धरा का गहरा सागर, 

मैं तेरी उफान बनूँ, 

तू नदियों की लहराती कश्ती, 

मैं तेरी पतवार बनूँ, तू ही 

बता न तुझसे कितना प्यार करूँ


एहसासों को लिखूँ या लिख कर

एहसास करूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ

तू फूलों का भटकता भौंरा, 

मैं तेरी फुलवारी बनूँ, तू राहों 

का बहका राही, मैं तेरा मुकाम बनूँ, 

तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ


एहसासों को लिखूँ या लिख कर 

एहसास करूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ

तू चैत-जेठ की चटक धूप, 

मैं तेरी साँझ बनूँ, 

तू आसमां का मंडराता बादल, 

मैं तेरी बूंदों की छम-छम राग बनूँ, 

तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ


एहसासों को लिखूँ या लिख कर 

एहसास करूँ, तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ

तू हर गोपी का कृष्ण कन्हाई, 

मैं तेरी राधा-रानी बनूँ, 

तू प्रेम पूर्ण मुरलीधर मुरारी, 

मैं तेरी मुरली की तान बनूँ, 

तू ही बता न तुझसे कितना प्यार करूँ


~ रानी साह