नित्या पाठक की सेवा-यात्रा में वृंदावन की विधवा माताओं की नई दीवाली

Sulabh International Social Service Organisation | Vrindavan : उदासी और सामाजिक उपेक्षा की धुंध को छांटते हुए शुक्रवार को वृंदावन का ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर दीपों की उस पावन रोशनी से जगमगा उठा, जो केवल त्योहार का उजाला नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा की एक नई किरण लेकर आई। कल तक जिन विधवा माताओं को सामाजिक रूढ़ियों के कारण उत्सवों से दूर रखा जाता था, उन्होंने पूरे उल्लास के साथ इस विशेष दिवाली समारोह में भाग लिया। 'सुलभ इंटरनेशनल' द्वारा आयोजित इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर जी रही इन विधवा माताओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें उनका खोया हुआ सम्मान लौटाना है।
भारतीय समाज की एक कड़वी सच्चाई यह भी रही है कि लंबे समय से विधवा महिलाओं को 'अशुभ' मानकर मांगलिक कार्यों और पर्व-त्योहारों से बेगाना कर दिया जाता था। इस तरह के संवेदनशील आयोजनों का ध्येय इसी सामाजिक कलंक और दंश को मिटाना है, ताकि समाज की हर स्त्री अपने सांस्कृतिक और मानवीय अधिकारों को पूरे सम्मान के साथ जी सके।

मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और बनारस की माताओं का एक बड़ा समूह दशकों से वृंदावन की पावन गलियों और आश्रमों में आश्रय की तलाश में जीवन बिता रहा है। अतीत में उन्हें किसी भी धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठान में भाग लेने की अनुमति नहीं थी, जब तक कि सुलभ इंटरनेशनल के दूरदर्शी संस्थापक (दिवंगत) डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनकी ओर अपनत्व का हाथ नहीं बढ़ाया।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में भक्ति की इस पावन नगरी में सामाजिक चेतना और बदलाव की एक सुहानी मंद बयार बहनी शुरू हुई है। सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने इस भावुक क्षण पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 500 साल पुराने ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर का यह प्रांगण केवल दीयों से रोशन नहीं हुआ था, बल्कि यह इन माताओं के जीवन में आशा, संबल, गरिमा और आत्मीय समावेश का एक प्रतीकात्मक प्रकाश पर्व बन गया।

विभिन्न आश्रय गृहों से आईं सैकड़ों माताएं जब एक साथ इस पावन स्थल पर एकत्रित हुईं, तो उनके हाथों से सजे रंग-बिरंगे दीये केवल मंदिर के कोनों को ही नहीं, बल्कि उनके चेहरों पर वर्षों बाद लौटी मुस्कान और तृप्ति को भी आलोकित कर रहे थे। वृंदावन की एक वृद्ध माता छवि दासी ने अपनी निश्छल खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "सेवा और संवेदना की इस अनूठी पहल ने हमारे जीवन के सूनेपन को खुशियों से भर दिया है। अब हम सभी माताएं बेहद आनंदित हैं और भगवान श्रीकृष्ण की इस पावन नगरी में पूरी गरिमा के साथ जीवन बिता रही हैं।"