देश को दिशा देने वाली सारण की 5 महान विभूतियाँ: राजनीति से कला तक जमाया परचम

rachnakosh.in · 16 September 2025 · 3 मिनट

देश को दिशा देने वाली सारण की 5 महान विभूतियाँ: राजनीति से कला तक जमाया परचम

सारण (बिहार): गंगा, गंडक और घाघरा की पावन धाराओं से सिंचित सारण (छपरा) की माटी केवल ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों के लिए भी जानी जाती है जिन्होंने देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से लेकर भोजपुरी साहित्य के शेक्सपियर और देश के पहले राष्ट्रपति तक, सारण का योगदान अद्वितीय रहा है। आइए जानते हैं सारण की उन 5 बड़ी हस्तियों के बारे में, जिनकी वजह से इस माटी को गर्व का अहसास होता है।


1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद: देश के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष

भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अटूट संबंध सारण की माटी से रहा है। (जीरादेई तात्कालिक सारण जिले का ही हिस्सा था)।

योगदान: स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के साथ अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने वाले 'राजेन बाबू' अपनी सादगी और प्रकांड विद्वत्ता के लिए जाने जाते थे।

पहचान: वे भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष रहे और आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति बनकर देश को लोकतांत्रिक नींव प्रदान की।


2. लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP): संपूर्ण क्रांति के जनक

20वीं सदी के सबसे प्रभावकारी नेताओं में शुमार लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म सारण जिले के सिताब दियारा गाँव में हुआ था।

योगदान: 1974 में भारत की राजनीति को हिला देने वाले 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन के नायक जेपी ही थे। उन्होंने आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की बहाली के लिए युवाओं और देश को एकजुट किया।

सम्मान: देश सेवा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया।


3. भिखारी ठाकुर: भोजपुरी के 'शेक्सपियर' और लोक कला के ध्वजवाहक

सारण के कुतुबपुर गाँव में जन्मे पद्मश्री भिखारी ठाकुर भोजपुरी साहित्य और लोक कला के सबसे बड़े स्तंभ माने जाते हैं।

योगदान: उन्होंने 'विदेशिया', 'बेटी वियोग' और 'गबरघिचोर' जैसे कालजयी नाटकों के माध्यम से पलायन, नारी पीड़ा और सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया।

पहचान: उनके द्वारा स्थापित 'लौंडा नाच' और भोजपुरी गीतों की शैली आज भी सारण की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा था।


4. पंडित रामअवतार शर्मा: महान विद्वान, भाषाविद और दार्शनिक

सारण के छपरा में जन्मे पंडित रामअवतार शर्मा भारत के जाने-माने संस्कृत विद्वान, भाषाविद और समालोचक थे।

योगदान: ज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय था। उन्होंने 'वाङ्मय नवनीत' और 'पद्य पंचशती' जैसी ग्रंथों की रचना की और प्राच्य दर्शन को नए दृष्टिकोण से देखने की दिशा दी।

पहचान: वे पटना विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक रहे और उनके विचारों ने आधुनिक भारतीय विद्वता को गहराई से प्रभावित किया।


5. मौलवी मज़हरुल हक़: कौमी एकता और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक

सारण (दीघवारा क्षेत्र) से गहरा नाता रखने वाले मौलवी मज़हरुल हक़ स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और सांप्रदायिक सौहार्द के महान प्रतीक थे।

योगदान: महात्मा गांधी के करीबी सहयोगियों में से एक, मज़हरुल हक़ ने असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

विरासत: पटना का प्रसिद्ध 'सदाकत आश्रम' और विद्यापीठ की स्थापना में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। उन्होंने हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता और शिक्षा के प्रसार के लिए काम किया।

सारण की माटी का अतुलनीय गौरव

चाहे देश का संविधान लिखने की बात हो, लोकतंत्र की रक्षा के लिए क्रांति का बिगुल फूंकना हो या लोक कला को वैश्विक स्तर पर पहुँचाना, सारण के इन सपूतों ने हर क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इनकी गाथा आज भी हर बिहारी और देशवासी को प्रेरणा देती है।